मैं बेगुनाह था | जमीर और सच्चाई पर दर्द भरी शायरी | Manoj Kumar
Hindi shayari 1. हर सबूत मेरे खिलाफ था हर फैसला भी तैयार था अदालतें भी खामोश थी मगर मेरे जमीर को य…
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सच की धूप में जला दिल और झूठ नकाब… पढ़िए बेपर्दा राज, खामोशी और हकीकत पर आधारित दर्द भरी शायरी जो द…