![]() |
| Hindi shayari |
1. हर सबूत मेरे खिलाफ था हर फैसला भी तैयार था अदालतें भी खामोश थी मगर मेरे जमीर को यकीन था कि मैं बेगुनाह था
2. वो भरोसा देकर गए थे कि लौटेंगे हम दिल को समझाया बहुत कि वो आएंगे मगर वक्त ने एक कड़वा सच सिखा दिया वापस वही आते हैं जो जाते नहीं है
3. भटकते हैं वो लोग जिन्हें प्यार नहीं मिलता जिंदगी के सफर में हमसफ़र नहीं मिलता कुछ लोग मुकद्दर से भी लड़ जाते हैं मगर हर किसी को चाहने वाला दिलबर नहीं मिलता
4. कभी हम जहां फैसला सुनाया करते थे आज वही गुनहगार बनकर खड़े हैं वक्त ने ऐसी चाल चली है मेरे दोस्त कभी आईना थे हम अब इल्जामों में जड़े हैं
5. गवाही झूठी थी चेहरे सब नकाब में थे फैसले बिके हुए थे रिश्ते हिसाब में थे मैं अकेला सच लेकर खड़ा रहा वहां क्योंकि मुझे पता था अब दिल ही मेरा सबूत है
6. कभी-कभी खुद मेरी चाहते मेरे खिलाफ बगावत छेड़ देती हैं हुई सभी गलतियां की शिकायत छेड़ देती हैं इस्तेफाक देखिए उसे बेगुनाह बताकर खुद अपनी सजा तय कर लेती हैं
✍️ लेखक : शायर मनोज कुमार
