सच की धूप में जला दिल और झूठ नकाब… पढ़िए बेपर्दा राज, खामोशी और हकीकत पर आधारित दर्द भरी शायरी जो दिल को छू जाए।
1. बहुत कुछ मुझसे छुपाया गया जो राज उसे बेपर्दा होना चाहिए था सच की धूप में मैं जलता रहा तन्हा झूठ का नकाब गिरना चाहिए था मेरी खामोशी को लोग कमजोरी समझ बैठे हर सवाल का जवाब खुलकर होना चाहिए था जब हकीकत आईने की तरह साफ है तो हर चेहरे को अपना असली चेहरा दिखना चाहिए था।
2. हर बात में लड़ने की उसकी आदत बन चुकी है शायद मेरी मोहब्बत अब शिकायत बन चुकी है चुप रहा तो उसने कमजोरी समझ लिया मेरी खामोशी अब उसकी हिम्मत बन चुकी है।
3. तुम मुस्कुराकर निकल जाओगी मेरी जमानत कौन देगा दिल की अदालत में तेरे खिलाफ गवाही कौन देगा एक झलक तेरी उम्र कैद बना देती है इस मोहब्बत में मेरी रिहाई कौन देगा।
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