1. वफा की कीमत चुका नहीं पाओगी जो दिया है वक्त लौटा नहीं पाओगी हमने तो दिल रख दिया तेरी कदमों में मेरे जैसी खामोशी एक दिन भी सह नहीं पाओगी।
2. दिल की बातें आंखों से हो रही है तेरी नजरे मुझ पर हक जाता रही है तू सामने है तो शब्दों की जरूरत क्या तुम्हारी अदाएं बड़ी गहराई से सब कुछ समझा रही है।
3. जो बताया गया वो हकीकत नहीं था उसकी वादों में कोई सच्चाई नहीं था मैंने हर लफ्ज़ को सच मान लिया मगर उसके किरदार में साजिश बहुत था।
4. हकीकत न तुमसे बताया गया है बहुत कुछ मेरी जान छुपाया गया है वफा करके न कुछ भी हासिल होगा तुम्हें क्योंकि साजिशों का जाल बिछाया गया है।
शब्दों में जज्बात-Shayar Manoj Kumar
